Aug 18, 2017 · कविता
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#पृथ्वी का भूगोल…

? पृथ्वी का भूगोल ?
???☁???☁??

समझ इसे तरबूज बड़ा-सा, पकड़ बीच से काटो।
करो कल्पना और धरा को, दो भागों में बांटो।
कटा हुआ तरबूज सभी ने, बड़े ध्यान से देखा।
कहा गुरूजी ने तब ये है, ‘भूमिमध्य की रेखा’।
पश्चिम से पूरब को जाती, विषुवत वृत्त बनाती।
यहाँ रात-दिन लगें बराबर, धूप यही समझाती।
‘शून्य मान अक्षांश यहाँ का’, समझें इसे कटोरा।
समय यहाँ दिन-रात बनाता, बारहमासी होरा।
”साढ़े तेईस अंश यदि हम, उत्तरी ध्रुव पर जाएं।”
खींच कल्पना से नव-रेखा, ‘कर्क इसे समझाएं।’
भूमिमध्य से यदि दक्षिण को, किये कल्पना जाते।
साढ़े तेईस अंश दूरहि, ‘मकर रेख को पाते।’
उत्तर ध्रुव पर शीत-क्षेत्र में, ‘सघन आर्कटिक देखा।’
‘दक्षिण में अंटार्कटिका को, मानो पंचम रेखा।’
पृथ्वी का यह मानचित्र है, अक्षांशों की गणना।
यदी मापनी चाहो दूरी, इसे ध्यान से पढ़ना।
‘तेज’ सूर्य की किरणें भू पर, ज्यों ही करें पदार्पण।
मान काल्पनिक दूरी करते, परिस्थलीय निर्धारण।
‘जीवन को धारण करता है, ग्रह अनमोल निराला।’
मिल्की-वे में रमें नवग्रह, ‘सूरज है रखवाला।’

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? तेज मथुरा✍

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नाम - तेजवीर सिंह उपनाम - 'तेज' पिता - श्री सुखपाल सिंह माता - श्रीमती... View full profile
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