पूर्वजों पर दोष

दिवाली छठ का त्यौहार बीत गया था,तिवारी जी का पूरा परिवार पूणे शहर से अपने गांव वंशी गाजीपुर उत्तर प्रदेश को नवंबर के अंतिम सप्ताह में घर पर रात के समय लगभग 10:00 बजे पहुंचे,किसी तरह रात बीत गई सुबह सभी लोग घर की सफाई में लग गए सात माह से घर बंद था,घर की सफाई बहुत तेज हुई क्योंकि चार दिन बाद तिवारी जी के घर पर पूजा बैठने वाला था,तिवारी जी का परिवार काफी कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे थे,पूजा की सलाह तिवारी जी के रिश्तेदार गांव के कुछ खास व्यक्तियों ने दी,तिवारी जी का परिवार में कुल चार सदस्य थे,तिवारी जी उनकी धर्मपत्नी नीलम,पुत्र अमन,चमन,अमन बड़ा था चमन छोटा था तिवारी जी के घर पर पितृ पूजा गृह शांति के लिए बाहर से तीन से चार पंडित जी पूजा करने के लिए आए हुए थे,उसी दिन मैं संजोग से तिवारी जी के घर पर पहुंचा,आप सोच रहे होंगे कि मैं कौन,मैं तिवारी जी का हितैषी एक दिन का पूजा खत्म हो चुकी थी,दूसरे दिन वाराणसी पिचास मोचन जाना था,तिवारी जी पंडित जी के साथ मुझे भी ले गए,हम सभी छह लोग वाराणसी पिचास मोचन घाट पर पहुंचे गए,पूजा आरंभ हो गई वहां पर कुछ और बाहरी व्यक्ति पूजा करवा रहे थे,मैं शांत बैठ कर पूजा की पूरा क्रिया-कलाप देख रहा था,पंडित जी संकल्प दिलवा रहे थे,तिवारी जी पूजा की कार्यशैली को पंडित जी के दिशा निर्देशों पर कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहे थे,तिवारी जी जब एक-एक के सिक्के दे रहे थे,तो पंडित जी का चेहरा देखने लायक लग रहा,जैसे पंडित जी यमराज बनकर तिवारी जी को आँख दिखा रहे हो,हमें और रिश्वत दो नहीं तो,अभी तुम्हारा बध कर दूंगा,बड़े संकोच के बाद तिवारी जीत 100-200 के नोट दिया,तो पंडित जी के चेहरे पर थोड़ी सी सनसनाहट सी हवा चली,पूजा संपूर्ण हुआ,पंडित जी तिवारी जी से कहा इस पात्र को ले लो,और इसे पेड़ के नीचे आपके पूरे पितरों को स्थान दिलाऊंगा जहां पर,वहां के पंडित जी को उनकी देखभाल के लिए,कुछ मोटी दक्षिणा देनी पड़ेगी,तिवारी अपने परिवार के खुशी के लिए यह भी कर दिए,वहां के पंडा ने तिवारी जी को रुला दिया लेकिन सौदा लगभग 20000 में तय हुआ,जो तिवारी जी की शायद एक माह का वेतन रहा होगा,वो पल भर में धूर्त महा आडंबर धारियों ने लूट लिया,यह इन महा पंडितों का चाल है,(मेरे इन वाक्यों को थोड़ा ध्यान देना इसका स्पष्टीकरण में आगे करूंगा किया आडंबर धारी कैसे हैं)सभी लोग वाराणसी से वंशी गाजीपुर रात को 9:00 बजे तक तिवारी जी के गृह स्थान पर आ गए एक तरफ भोजन बन रहा था,तो एक तरफ सभी लोग परिचर्चा में जुट गए अमन अपनी कुंडली एक पंडित जी से बचवा रहा था,उसी समय अमन का एक दोस्त वहां पर आकर महा धूर्त धारी पंडित जी को अपने घर की दयनीय दशा बताया,और निदान के लिए पूछा पंडित जी सावधान मुद्रा में बैठकर मन में बुद-बुदा या और दो मिनट बाद आंख खोली,बोला बच्चा आपके घर पर महादोष है,आपके पूर्वजों ने काफी अन्याय किया है,गरीब दुखियों के लोगों के साथ गलत किया है,उसी का दंड है,इसका निवारण करना होगा,आप सभी थोड़ी स्वतंत्र हो जाओ,फिर हमें बुलाकर गृह शांति का पाठ करा कर चैन की सांस लो,मैं वचन देता हूं,फिर कोई बाधा आपके घर में प्रवेश तक नहीं करेगी,10 फीट दूर से ही वह बाधा डर के भाग जाएगी,मैं तुमको इसका साक्षात प्रमाण दूँगा,अमन का दोस्त चला गया..!
फिर महा पंडित जी बातों ही बातों में अपने घर का वर्णन बताना चालू किया,कि मेरे घर पर मेहमान का आदर सत्कार होता है,हमारे यहां हमेशा समाधान के लिए 200-300 व्यक्ति रोजाना आते हैं,और समाधान पाते हैं,तभी तिवारी जी ने एका-एक पूछा महाराज जी आपके परिवार में कितने व्यक्ति हैं,क्या करते हैं..!
सभी व्यक्ति कुछ ना कुछ गलती जरूर करते हैं,वही चीज महा पंडित जी ने भी दोहराई,चार बच्ची हैं,और मेरी धर्मपत्नी,एक बेटी को कैंसर है,जो बड़ी है,छोटी को दौरा पड़ता है,बीच वाली से तो हमेशा परेशान रहता हूँ,उसके घर से हमेशा शिकायत आती है,कि हमेशा बीमार रहती है,एक को कुछ सुनाई नहीं देता,पत्नी को ब्लड प्रेशर शुगर है,मैं हाजमा की दवा लेता ही हूँ ,…!
मित्रों मेरे से रहा नहीं गया मैं दो दिन बाद अमन के दोस्त के गांव गया,और उनके खानदान का इतिहास निकालने गया और सुना कि उनके दादा गांव में पोखरा निर्माण,कुआं का खुदाई,कई एकड़ जमीन चरागाह गांव के लिए,ब्राह्मण को दान दे दिया था,कई गरीब कन्याओं का विवाह करवाया,गांव में पाठशाला का निर्माण करवाया,आज भी उनके दरवाजे पर ब्राह्मणों का आदर सम्मान होता है,पंडित जी और अमन के दोस्तों के घर की वास्तविकता आपके सामने आ गई, पंडित जी इतने महान होते,तो अपने घर की भी समस्या का समाधान जरूर करते हैं,यहां ढोंगी पंडित को अपने घर में पूर्वज दोष नहीं दिख रहा है,और हमारे-आपके घर जो व्यक्ति मेहनत करके दो रोटी कमा रहा है,उसके घर पितृदोष बता रहे हैं,आधुनिक युग में जी रहा है,मनुष्य फिर भी आंखों पर पट्टी बांधकर इन पंडितों पर अपने मेहनत की कमाई को नाश कर रहा है,मानव को संघर्ष और धैर्य से हर एक समाधान का निवारण कर लेता है, मनुष्य जान रहा है कि ये धूर्त है,फिर भी इन लोगों के जाल में फंसता जा रहा है,…!
मै भी कहता हूँ,कि पूजा-पाठ एक ऐसी शक्ति है,जो मनुष्य को एक साहस और आत्मविश्वास मंजिल का सहारा देती है,लेकिन इन महा धूर्तों के चक्कर में ना पड़े,पूजा पाठ करना ही है,तो गायत्री जाप,महामृत्युंजय जाप,रामायण का पाठ करो,अपने-अपने महा ग्रंथों के महा ज्ञान का पाठ करों,जिससे हमें और आपको कुछ मिले,न कि इन महा धूर्तों के चक्कर में आकर अपनी पूरी कमाई को गंवा दें,और अंध-विश्वास के भाँति यह सोचे कि मेरे पूर्वज अधर्मी थे,अन्यायी थे,जो उनकी सजा में भूगत रहा हूँ,अपने कर्मों को दोष दो,अपने पूर्वजों को नहीं,ओ तो बड़े ही भाग्यवान थे,कि अपने अति संकट के परिस्थितियों में भी अपने मान सम्मान को बचाकर,तुमको-हमको अपना कुछ अंश देकर गए हैं,उनका धन्यवाद करो,कि हमको हमारे पूर्वज कुछ देकर गए हैं,ना कि हमको तुम को समस्या देकर गए,उन महापुरुषों को क्यों गलत ठहरा रहे हो,अपने कर्मों से अपने आत्मबल से अपने पूर्वजों का नाम रोशन कर उनकी दी हुई,कुछ अंश को सजोकर रखो,अपने जीवन पथ पर दृढ़ता से आगे बढ़ो…..!धन्यवाद
राइटर:-इंजी.नवनीत पाण्डेय सेवटा (चंकी)

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 1 Comment 0
Views 19

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share