May 15, 2021 · कविता
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पूर्ण नशाबंदी

जहां देखो यही बात हो रही है
हर तरफ नशाबंदी हो रही है
हम ढूंढ लेंगे नशा उनकी आंखों में
उनकी आंखें कहां बंद हो रही है।।

अनंत नशा है आंखों में उनकी
जो हर तरफ खुले में घूम रही है
जो नशा चंद घंटों तक रहता है
जाने उसकी क्यों बंदी हो रही है।।

नशा शराब का हो या कोई और
वो तो चन्द घंटों का ही होता है
उस नशे को कैसे बंद करेगा कोई
जो उनकी आंखों में छुपा होता है।।

मयखानों पर ताले लग सकते है
होटलों के बार बंद कर सकते है
उस हसीना की आंखों में जो
नशा है उसे कैसे रोक सकते है।।

पिलाती है वो निगाहों से जो
वो भी नशे का कारोबार करती है
फिर हमारी पुलिस क्यों नहीं
उसे भी कभी गिरफ्तार करती है।।

पारखी नजरें चुराती है वो नशा
फिर दिल में उतरता है वो नशा
अगर चढ़ जाए वो किसी को तो
फिर कभी नहीं उतरता वो नशा।।

रोकना है उसे तो पलकों पर
तुझको पहरे लगाने होंगे
आंखें ना खोलें कोई हसीना
ऐसे नियम भी बनाने होंगे।।

जिंदगी फिर नीरस हो जायेगी
किसी को सुकूं ना दे पाएगी
दुनिया इतनी बड़ी सज़ा पाएगी
पूर्ण नशाबंदी जब हो पाएगी।।

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Surender sharma
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