सभी का एक है नारा कि हिंदुस्तान है हिंदी

बसी है धड़कनों में ये, हमारी जान है हिंदी ।
हमें है गर्व हिंदी पर, हमारी शान है हिंदी ।

सरल गंगा नदी सी यदि अडिग भी है हिमालय सी
चमकती चाँद सूरज सी पतित पावन शिवालय सी
मिली है ये हमें अपने पुराणों और वेदों से
तभी तो विश्व में रखती अलग पहचान है हिंदी

ये हिंदी ही हमारे हिन्द की अपनी कहानी है
कलम की धार तीखी भी इसी की ही जुबानी है
हमारी भावनाओं का यही शृंगार करती है
कराती सैर दुनिया की किताबी यान है हिंदी

महादेवी निराला मैथिली हरिऔध या दिनकर
सुमित्रापन्त मीरा या रहे रविदास जयशंकर
किये गुणगान कविता में सभी ने खूब हिंदी के
बिहारी जायसी तुलसी यही रसखान है हिंदी

बदलते वक्त ने सम्मान भी इसका बढाया है
इसे अब प्यार से सबने गले अपने लगाया है
हमारी भारती माँ के यही है भाल की बिंदी
सभी का एक है नारा कि हिंदुस्तान है हिंदी

14-09-2019
डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद

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