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"पूनम की रात"

आज चाँद पूरी कला में है,
पूनम की रात जो है,
चाँदनी से मिलन की रात है,
देखो तो चाँदनी सोलह श्रृंगार में,
कितना इठला रही है,
ये सौंदर्य ये छटा ,
मानो अभी दुग्ध स्नान कर आयी हो,
मखमली रूप लिये,
जाने कितने स्वप्न सजोये,
धरा पर बिखर गयी है,
नहीं पता ये सब कुछ,
चार दिन का है,
फिर चाँद गुम हो जायेगा,
कुछ मधुर यादें छोड़ जायेगा,
रहने दो इन बातों को,
आज मचलने दो कुछ सपनों को,
कुछ कल्पना में रंग भरने दो,
कि आज पूनम की रात है||
…निधि…

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डा0 निधि श्रीवास्तव
डा0 निधि श्रीवास्तव "सरोद"
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"हूँ सरल ,किंतु सरल नहीं जान लेना मुझको, हूँ एक धारा-अविरल,किंतु रोक लेना मुझको"