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पूनम का चाँद

पूनम का चांद चांदनी विखराता
मोती सदृश छिटक कर नभ भाता
तारे छिपा छिपी कर टिमटिम करते
शून्य गगन मे अपनी आभा से रंग भरते
कौन प्रकाश देता है चंदा को छिपकर
पाकर आभा किसकी बनता है रजनीकर
सीख मिलेगी सही दान की देखो दिनकर
कौन जानता देता है प्रकाश भाष्कर
विन्ध्य सा ऊंचा उज्ज्वल तब बनता है हिमकर
विन्ध्यप्रकाश मिश्र

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Vindhya Prakash Mishra
Vindhya Prakash Mishra
नरई चौराहा संग्रामगढ प्रतापगढ उ प्र
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विन्ध्यप्रकाश मिश्र विप्र काव्य में रुचि होने के कारण मैं कविताएँ लिखता हूँ । मै...