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पूज्यवर गुरुवर तुम्हें प्रणाम!

मुकेश कुमार बड़गैयाँ

मुकेश कुमार बड़गैयाँ

कविता

July 9, 2017

पूज्यवर गुरुवर तुम्हें प्रणाम!
खोलो नव आयाम —
घनघोर अंधेरा है प्रभु ज्ञान का दीप जलाओ—
प्रभु अर्जुन भटक रहा है !
प्रभु तुम कृष्णा बन आ जाओ—
कंकड़-पत्थर जोड़ रहा इंसान
चारों तरफ बस दाम ही दाम!
जय जय सीताराम जय जय राधेश्याम
पूज्यवर गुरुवर तुम्हें प्रणाम!
खोलो नव आयाम
झगड़ रहे व्यर्थ सभी
एक पिता की हम संतान
न्याय मिले जन जन को
जीवित रहे ईमान
पूज्यवर गुरुवर तुम्हें प्रणाम!

मुकेश कुमार बड़गैयाँ,कृष्णधर द्विवेदी अध्यापक (अंग्रेजी )शासकीय हा से स्कूल बारहाबड़ा(नरसिंहपुर )
शिक्षा -ma,mphil(English ),M.ED.,PGDT,PGDTE(ELTI ,RSK,Bhopal,TGT,AT MODEL SCHOOL PATHARIA- Damoh-2014-15,2015-16
E-mail -mukesh.badgaiyan30@gmail.com

Author
मुकेश कुमार बड़गैयाँ
I am mukesh kumarBadgaiyan ;a teacher of language . I consider myself a student & would remain a student throughout my life.
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