Jan 13, 2021 · कविता

पूछ रही थी बेटी

पुछ रही थी बेटी,पपा क्या नहीं हमकों जीनेका अधिकार
जवाब देना तुम हमें पपा,बनकर अधिकरी तुम सज्जनार

कब तक गुड़िया ,निर्भया,प्रियंका इस कदर मारी जाएंगी
कब तक देश की बेटियां दम तोड़ेंगी सहकर के बलात्कार

कब तक मैं ख़ामोशी से नन्ही चिड़िया सी बनू रहूँ बता दो
कब तक ये पर कतरे जायेंगे क्या नहीं उड़ने का अधिकार

क्या भूखे भेड़ियों को बचाने की ख़ातिर ये न्यायालय ठहरे
क्यो बचाने को आतें आतंकी यहाँ पर झूठे मानवाधिकार

क्या हम मानव नहीं जो हमकों हमारे सही अधिकार मिले
क्या न्याय भीख मांगता रह जायेगा यहाँ पर बीच बाजार

बस इतना रहम कर्म कर देना,अपनी इस बेटी पर तु पपा
गर्व से सर उठा के चलू,गर न्याय दें प्रियंका को सज्जनार

उठालो बंदूके अपनी तुम प्यारे पाया ले जाओ उसी मैदान
इन भूखे कुत्तो का करके दिखाओ मुझको तुम भी शिकार

कोई पूछे तो कह देना आज से देश की बेटी सुरक्षित होगी
जब तक राजा ये सिंह रहेगा कही पर नही होगा अत्याचार

हो सके तो मेरी गुज़रिश का ख़्याल रख दो सम्मान मुझे
सुबह उठाना तब न्याय मिलने का मुझको दें तुम समाचार

****

प्यारी बेटी तू उड़ना जाकर के, ऊंचे से ऊंचा आसमान
ले जाके भगा भगा मार गिराया उनको मैने उसी मैदान

तुम गर्व से सर उठाकर चलना अंधेरों से नहीं डरना है
लक्ष्मी बन तलवार उठा,कल्पना सी ऊंची रख उड़ान

ना कोई तारीख होगी न कोई दिन तय होगा अब यहाँ
मानवता को मारेगा ना कोई मानवाधिकार का शैतान

तुमने जो माँगा न्याय देश की बेटी बनकर मुझसे यहाँ
तेरे उठने से पहले प्रियंका को न्याय सँग मिला सम्मान

देख लेगा तेरा ये पपा अब खाकी पर लगाते दागों को
पर नही गिरने देगा अपनी बेटी का देश मे स्वाभिमान

नहीं तुमको यहाँ बंदूक चलानी होगी सुनलो तुम बेटी
प्रियंका जा निर्भया गुड़िया से कह देगी जय हिंदुस्तान

नयाय अब बस न्याय होगा तुम उठकर समाचार लें
कूत्तो की मौत मार गिराया जाकर के मैंने उसी मैदान

प्रियंका की आत्मा को शान्ति मिल जाएगी बेटी अब
सज्जनार ने कर्तव्य निभाया रख कर बेटी की ज़ुबान

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स्नातक पास कविता लिखना व कार्टून बनाना अधूरा मुक्तक ,अधूरी ग़ज़ल, काव्यगंगा, हमारी बेटियां आदि...
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