पुस्तक समीक्षा

पुस्तक समीक्षा

कृति :- शालेय पत्रिका बाल अभिव्यक्ति ( स्वच्छता ही सेवा विषेषांक)
प्रकाशक :- बाल केबिनेट शासकीय नवीन प्राथमिक विद्यालय(शाला सिद्धि)
नयापुरा माकनी
जनशिक्षा केन्द्र नागदा
जिला धार मध्यप्रदेश
प्रेरणा स्रोत:- गोपाल कौशल
सहायक अध्यापक, नेशनल मोटिवेटर,नवोदय क्रान्ति भारत
समीक्षक:- राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित”
कवि,साहित्यकार
( राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त शिक्षक)

शासकीय नवीन प्राथमिक विद्यालय नयापुरा माकनी द्वारा प्रकाशित बाल अभिव्यक्ति का यह पञ्चम विषेषांक स्वच्छता ही सेवा पर आधारित है।शाला प्रबन्धन समिति एवम बाल केबिनेट शिक्षिका मनीषा चौहान के सहयोग से नेशनल मोटिवेटर नवोदय क्रांति भारत ने विगत पाँच वर्षों से यह कृति विद्यालयी बच्चों की विभिन्न गतिविधियों के प्रकाशन हेतु प्रकाशित की है।
यह अंक स्वच्छता ही सेवा थीम पर आधारित सामयिक लगा। आज सारे देश मे स्वच्छता अभियान की अलख जगाने हेतु खूब प्रयास किये जा रहे हैं। ऐसे मौके पर देश के ख्यातिनाम कवि बाल साहित्यकार गोपाल कौशल जी ने अपने प्रयासों से विद्यार्थियों को बालपन से ही संस्कार व संस्कृति के साथ ही जीवन मे सबसे जरूरी स्वयं की सफाई व परिवेश की स्वच्छता के बारे में जागरूक करने की अनूठी पहल की है। छोटी छोटी बाल कविताओं बाल गीतों के द्वारा आपने इस विशेष अंक हेतु बहुत सुंदर प्रयास किया है। सीधी सरल भाषा मे सजी रचनाएँ बच्चों को संस्कारवान बनाने में सक्षम लगी।
संपादक पीयूष ने लिखा स्वच्छता में ही ईश्वर का वास होता है। स्वच्छता का संदेश जन जन तक पहुंचे इस उद्देश्य से प्रस्तुत कृति प्रकाशित की है। गागर में सागर सी सम्पादकीय टिप्पणी बहुत अच्छी लगी।
शाला प्रमुख की कलम से में प्रमुख लिखते हैं स्वच्छता व विकसित देश बनाने हेतु उपदेश देने से नहीं देश व समाज को संदेश देना चाहिए। पहले स्व शासन फिर अनुशासन । बहुत सार्थक बात कही।
स्वच्छ भारत सुन्दर भारत स्वच्छ तन स्वच्छ मन सब जरूरी है। इस कृति की प्रमुख रचनाएँ स्वच्छता गाँव नमामि देवी नर्मदे यात्रा नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा एक संकल्प वन्य जीव संरक्षण जैसी रचनाएँ हैं।
जिला प्रशासन द्वारा शाला सिद्धि सम्मान अंतर्गत इस कृति का विमोचन किया गया। स्वच्छ भारत इस कृति की प्रथम रचना है। साहित्य नच स्तम्भ में प्रकाशित आओ हम मिल बांचे में बाल श्रम की समस्या का निदान खोजने की बात कही गई है। बिना भेदभाव से शिक्षा जैसे विषयों पर आधारित है।
“वालिंटियर सब मिलकर भैया विद्यालय को स्वर्ग बनाएं
साबुन से हाथ धोने के तरीके पुस्तक में विभिन्न चित्रों के माध्यम से बताया है। रोचक व बोधगम्य कृति बन गई। कौशल जी ने पूरा कौशल बताया है। सहज सरल तरीके से काव्यमय गतिविधियों द्वारा स्वच्छता का महत्व जगाती रचनाएँ हैं।
शैक्षिक गुणवत्ता को मिल जाएं
जन जन में शिक्षा सहयोग जगाएं
हर शाला में हो आनंदमय शिक्षा
ऐसी शाला बनाएं आओ मिल बांचे
इस कृति में सफाई अभियान आकर्षक स्कूल हमारी शाला ऐसी हो गुड्डा राजा आ जाओ शास्त्री गाँधी अच्छा बच्चा बनना है स्वच्छता पहाड़ा वर्णमाला गीत बन्दर मामा की सगाई शाला बच्चों की तुलिकाओं के लाजवाब चित्र बड़े सुंदर है।
कद्दू जी की बारात नंदू को जुकाम बया हमारी चिड़िया रानी हुआ सवेरा जैसी कविताओं के लिखने वाले बाल कवि व बाल कवयित्रियों क्रमशः शुभम सचिन खुशब तथा सूरज को बधाई।
गाँव नगर स्वच्छ बनाएं हम स्वच्छ भारत अभियान रचना में शक स्वच्छ स्वच्छ परिसर सतत संवाद ग्रामीणों से साफ पानी पीना भोजन ताजा ग्रहण करना प्रतिदिन मंजन करना योग व्यायाम करना तेल मालिश कंघी करना पोषक भोजन लेना दूध छाछ लेना वृक्षों को बचाना खुले में शौच जाना घर द्वार हरियाली आदि संदेश इस काव्य रचना में दिए हैं।
बाल कविता स्वच्छ विद्यालय सुन्दर विद्यालय स्वच्छता का पहाड़ा विद्यालयी समाचार के साथ ही स्वच्छता पखवाड़ा चित्रकला प्रतियोगिता व स्वच्छता की शपथ बहुत महत्वपूर्ण हैं
मैं लिखना सीखूंगी ताकि अपनी किस्मत खुद लिख सकूँ।मैं पढ़ना सीखूंगी ताकि जिंदगी को पढ़ संकूँगी।
स्कूल चलें हम। सब पढ़ें सब पढ़ें। इस कृति में जॉय फूल लर्निंग बाल कविता बच्चों की पहली पसन्द रहेगी।
विद्यालयी पत्रिकाओं के इसी तरह विशेष अंक प्रकाशित होते रहें ताकि बाल प्रतिभाएं अपनी नन्ही कलम चलाते रहें। बहुत बहुत बधाई पूरे विद्यालय परिवार खासकर उन बच्चों को जिन्होंने इतनी छोटी सी उम्र में कविताएं लिख कर जन जन को स्वच्छता के लिए जगाने का कार्य किया। विद्यालय प्रमुख व मनीषा जी चौहान जैसी शिक्षका बधाई की पात्र है। ये कृति प्रदेश के सभी विद्यालयों में पहुँचे ऐसा प्रयास जारी रखियेगा। पुनः बधाई।
– राजेश कुमार शर्मा “पुरोहित”
98,पुरोहित कुटी श्रीराम कॉलोनी भवानीमंडी जिला झालावाड राजस्थान

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