पुस्तक समीक्षा

पुस्तक समीक्षा

पुस्तक का नाम :- अरुणोदय
कवि:- डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव”अर्णव”
पृष्ठ:- 112
प्रकाशक:- साहित्य संगम संस्थान प्रकाशन,आर्य समाज 219,संचार नगर एक्स.इंदौर मध्यप्रदेश पिन 452016
समीक्षक:- राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित”
साहित्यकार
साहित्य संगम शिरोमणि डॉ. अरुण श्रीवास्तव “अर्णव” का प्रथम काव्य संग्रह”अरुणोदय” है।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी कवि श्रीवास्तव ने अपनी कृति में कुल 104 रचनाएँ लिखी जो एक से बढ़कर एक हैं। पुस्तक का मुखावरण बहुत आकर्षक लगा।शिल्प की दृष्टि से सभी रचनाएँ ठीक है। कविता की भाषा शैली विचारात्मक है। विषयों के अनुकूल भाषा का प्रयोग किया गया है।
कृति में अध्यक्षीय निर्झरणीय में संस्थान के अध्यक्ष राजवीर सिंह मन्त्र ने गायत्री मंत्र से श्री गणेश किया और लिखा कि समाज मे व्याप्त अज्ञान अंधकार का सर्वनाश करेगी। ये कृति आचार्य भानुप्रताप वेदालंकार जी के दिग्दर्शन में प्रकाशित हुई। कवि श्रीवास्तव को रणवीर सिंह अनुपम,अवदेश कुमार अवध,ब्रजेन्द्र सिंह सरल,शैलेन्द्र खरे सोम जैसे हिंदी साहित्य जगत के साहित्य मनीषियों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। निश्चित रूप से ये कृति साहित्य में अपनी नई पहचान बनाएगी। अरुणोदय की प्रथम रचना “आराधना” में कवि कहता है शब्द से गुंजित करे, मन की अपने भावना,यह रचना कवि की अध्यात्म में गहरी रुचि को दर्शाता है। जीवन में सकारात्मक सोच रखने वाले कवि अपनी अगली रचना ‘आशा’ में लिखते है अनुशासन के साथ सभी जीवन में नूतन गान करे। उनकी श्रृंगार की रचना आज उसके प्यार को “इक छुअन ने पा लिया है,प्यार की मनुहार को। याद फिर मौसम दिलाता, आज उसके प्यार को। अगली रचना देशभक्ति से ओतप्रोत में वे लिखते है वोटों की इस राजनीति में सदा सही को डांट दिया। आज की राजनीति में निर्दोष को दंडित किया जाता है। सियासत के गलियारे की सच्चाई को श्री वास्तव जी ने बखूबी लिखा है। नववर्ष रचना में लिखते है “बहके हुए जज़्बात में,नववर्ष तेरे साथ में” श्रृंगार की एक और रचना ‘तेरा साथ’ में कवि की आशावादी सोच का चित्रण साफ दिखाई देता है। वे लिखते है- जीवन में भरी निराशा को तुम प्यार से अपने पिघलाओ’
जंगल, स्वस्थ समाज जैसी रचनाएं ज्ञानवर्धक लगी। योग शीर्षक से लिखी कविता में श्रीवास्तव लिखते है-सारा जग हो योगमय,ऐसा रचे समाज। एक हिंदी सेवी के रूप में कवि अपना कर्तव्य निभाते हुए भाषा शीर्षक से कविता में लिखते है “उनन्त भाषा गर्व हमारा,जिये हमारा हिंदुस्तान”। जिंदगी की आस के मुक्तक दिल को छू गए।
माँ, बचपन, राष्ट्र उत्थान, रिश्ता, होली, फ़ाग, गुलाल, कविताएँ, देशभक्ति व भारत के प्रमुख त्योहारों में दिखाई देने वाली कौमी एकता को दर्शाता है। कारवां कविता में कवि दर्द को बयां करते है “दर्द है तो दर्द में भी खिल रही है जिंदगी”। प्रभात की प्रभा स्वयं कर रही है बन्दगी।
माँ का प्यार, पूनम का चांद, बेटियाँ, आनंद, नारी का प्यार, आदि रचनाएँ भी नारी सशक्तिकरण से जुड़ी हुई सारगर्भित लगी। रोशनी के गीत के अंतर्गत ” जो जीते रहे उम्र भर,रोशनी के सदा गीत लिखते रहे। अपनी रचना में अंधेरों से लड़ने की सीख देती है।
पहला प्यार,खत,पहचान,खुशबू आदि भी कृति के आकर्षण है। पर्यावरण शीर्षक से लिखी रचना में बढ़ती आबादी के कारण पर्यावरण को कितना नुकसान हुआ है। आप लिखते हैं”कंक्रीट के जंगल बोये, काटे पेड़ हज़ारों में। पर्यावरण की चिंता होगी,कुछ जोशीले नारों में।।
इस कृति में सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयो पर 104 रचनाएँ पर्यावरण,प्रकृति,सामाजिक समस्याओं,देशभक्ति, महिला सशक्तिकरण,आतंकवाद, हिन्दी भाषा की समस्या ,त्यौहार (होली),व्यक्तित्व निर्माण ,मानवीय जीवन मूल्यों,बाल श्रम,विरह,तन्हाई आदि विषयों को आधार बनाते हुए कविताओं का उत्कृष्ट सृजन किया है। कृति की अंतिम कविता भारतीय रेल है।
इस कृति की कविताओं में यथार्थ का खुदरापन तथा भावगत सहज सौंदर्य भी विद्यमान है। अरुणोदय की सभी रचनाएँ बहु आयामी व विचार पक्ष से समन्वित हैं।
प्रकृति का आत्मीय एवम व्यापक चित्रण भी देखते ही बनता है।
“अरुणोदय “कृति साहित्य जगत में अपनी पहचान बनाएगी ऐसा विश्वास है। कवि श्रीवास्तव को हार्दिक बधाई।
98, पुरोहित कुटी,श्रीराम कॉलोनी
भवानीमंडी जिला झालावाड़
राजस्थान

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