पुलिस आ रही है

यूं तो छमिया रोज़ ही हाट से सब्जी बेचकर दिन ढले ही घर आती थी, पर आज तनिक देर हो गयी थी. वह थोड़ी देर के लिए अपनी मौसी से मिलने चली गयी थी. युग -ज़माना का हवाला देकर मौसी ने उसे यहीं रुक जाने को कहा था, पर बूढ़ी माँ को वह अकेले छोड़ भी कैसे सकती थी? जब वह मौसी के घर से चली थी तो सूरज अपनी अलसाई आँखें मुंदने लगा था. छमिया तेज-तेज डग भरने लगी , पर शायद रात को आज कुछ ज्यादा ही जल्दी थी. देखते ही देखते चारो ओर कालिमा पसर गयी. वह पगडण्डी पार कर रही थी. अचानक उसे बगल की झाड़ियों में खड़-खड़ की आवाज़ सुनाई पड़ी. एक आदमी उसका पीछा करने लगा. छमिया लगभग दौड़ने लगी. थोड़ी देर पीछा करने के बाद वह आदमी पीछे लौट गया. छमिया अभी भी दौड़ रही थी, अचानक उसे सामने से आती हुई पुलिस की जीप दिखी.यह क्या, छमिया उल्टी दिशा में भागने लगी—- जिस आदमी से वह डरकर भाग रही थी, उसीका बांह पकड़ कर बोली -“बचाई लो भईया!पुलिस आ रही है.”
— सतीश मापतपुरी

6 Comments · 13 Views
I am freelancer Lyricist,Story,Screenplay & Dialogue Writer.I can work from my home and if required...
You may also like: