पुलवामा हमला:- हमारे लिए तुम आग पीकर चले गये

हमारे लिए तुम आग पीकर चले गए।
मोहब्बत तुम इस कदर निभाकर चले गए।।

हम खुद में खोये थे , और तुम्हारे शरीर जल रहे थे।
कितनें घरों के चांद, सदा के लिए ढ़ल रहे थे।।

उन माँओ दिल अचानक ठहर गया होगा,
उनके आंचल का रक्त, जिस पहर बहा होगा।।

इस खबर को मां के कानों ने किस तरह सुना होगा।
सुनकर ये सब उस ह्रदय को फिर, किस तरह सबर होगा।।

नियति भी उस दिन रोई होगी, देख के ये सब मंजर को।
आयें होंगे आंसू सारी नदियों और समुन्दर को।।

हमारी रूह में, रग-रग में तुम जीकर चले गए।
मोहब्बत तुम इस कदर निभाकर चले गए।।

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