Feb 19, 2019 · कविता

पुलवामा के शहीद

पुलवामा का हाहाकार,
मचा देश भर मे हैं आज ।
भूल में बैठें हैं जन सारे,
आतंक का हो गया आग़ाज़।
उन माँओं की आँख से ,
आँसू निरंतर बहते रहते हैं,
क्या गुज़री उन बाप पर ,
जिनके बेटे काँधे जातें हैं।
कुछ दिन लहर उठेंगी सबमें,
फिर शान्त सभी हों जाएँगे।
पुलवामा के वीर शहीदों को,
यें कैसा न्याय दिलाएँगे।
दिल्ली में सरकार जों बैठी,
न्याय की उनसे गुहार हैं।
सूनी माँग हुई हैं कितनी ,
रोते हुए बच्चें पापा रहे पुकार हैं।
जलकर वीरों को जो तड़प मिली थी,
ऐसी ही तड़प उन्हें देना ।
नही दें सको न्याय नेताओं,
ख़ुद को भी ग़द्दार ही कहना …….

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M.sc( maths),b.ed
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