पुलवामा अटैक

मुल्क मेरा डस रहे है नाग ये काले कई
सुन जवानों की शहादत आज दिल दहके कई
देख कर इनकी शहादत आसमां भी रो रहा
याद में इनकी न घर में है जले चूल्हें कई

जो अरमान सजो रखे सजने से पहले बिखर गये
लौट वापस आने की कह न जाने किस डगर गये
पलक बिछाए बेटी पत्नी माँ की साँसे टूट गई है
अब न वापस आओगे लोट तुम तो हो अमर गये

किसी की माँग का सिन्दूर तो किसी का भाई था
पापा पापा चिल्लाती जो उस बेटी की परछाईं था
धर्म क्या जाने वो शातिर जो खून से खेले होली.
आत्मा मर गई कर सका भगवान न भरपाई था

Like 1 Comment 0
Views 3

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share
Sahityapedia Publishing