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“पुलकित पुष्प सम हो जीवन”

Dr. Mahender Singh

Dr. Mahender Singh

कविता

September 26, 2017

???
ये ? पुष्प
एक संदेश
एक अहसास
यही पैगाम
एक आगाज,
एक उत्पत्ति
एक बीज़
एक शुरुआत
एक अभिनंदन
यही आगोश
यही ममता,
यही प्रेम,
बस तुम जान जाओ,
तुम जागरण मनाओ,
प्रकृति में घुलमिल जाओ,
हर क्षण सुखद है,
खुशियां मनाओ,
पुष्प सम पुलकित
जीवन का आनंद मनाओ
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Author
Dr. Mahender Singh
(आयुर्वेदाचार्य) शौक कविता, व्यंग्य, शेर, हास्य, आलोचक लेख लिखना,अध्यात्म की ओर !

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