कविता · Reading time: 1 minute

पुराने खत

आज सुबह सुबह उसकी याद आ गई
सूखे चमन में फिर से बहार आ गई
ढूंढकर लाया मैं उसके वो पुराने खत
जब पढ़ने की कोशिश की उन्हें तो
हर लफ्ज़ में उसकी तस्वीर नज़र आ गई।।

उसके ये खत ही अब मेरी जिंदगी है
मेरी प्रेम कहानी की सुनहरी यादें है
बहुत सारा प्यार है, अपनापन है इनमें
और लगता है चंद प्यार के झूठे वादे है ।।

वो तो कहती थी प्यार करती है मुझे
जान से भी ज़्यादा वो चाहती है मुझे
और एक दिन फिर मिलने का वादा करके
तड़पने के लिए अकेला छोड़ गई वो मुझे ।।

कोई तो उसकी भी मजबूरी रही होगी
जो वो इस तरह मुझसे यूं दूर गई होगी
मैं तो कभी भी उसे बेवफा नहीं मानता
बस किसी बात पर मुझसे खफा हुई होगी।।

वो भी कभी तो मेरा ख्याल करती होगी
मेरे लिखे वो खत कभी तो पढ़ती होगी
उसकी आंखो में भी कभी आंसू तो आते होंगे
मेरी याद में उसकी आंखें कभी तो नम होती होगी ।।

मेरे उन खतों से जब धूल साफ करती होगी
मुझसे ना सही उनसे तो बात करती होगी
अपनी मजबूरियां उनको ही बयां करती होगी
यही सोचकर दिल को बहला देता हूं
वो इसी बहाने मुझे कभी तो याद करती होगी ।।

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Author
कवि एवम विचारक
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