Jun 17, 2016 · कविता
Reading time: 1 minute

पुनीत लिखूं

वर दो जगदम्ब कि लेखन में भर शक्ति व सत्य सुगीत लिखूं
मन निर्भय होकर झूम सके अब वैर नहीं बस प्रीत लिखूं
रसपूर्ण सुछंद सदैव रचूँ मन सिन्धु मथूं नवनीत लिखूं
कुछ भोग लगा कर के मधु का तव नेह प्रभाव पुनीत लिखूं
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
कवि एवं ज्योतिषाचार्य
लखनऊ

8 Views
Ashutosh Vajpeyee
Ashutosh Vajpeyee
15 Posts · 112 Views
I am a professional astrologer and very much active in the field of poetry View full profile
You may also like: