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पीली सरसों

रकमिश सुल्तानपुरी

रकमिश सुल्तानपुरी

हाइकु

February 8, 2017

पीली सरसों

बिहँस उठी
पंख पसार कर
पीली सरसों

इठलातीं है
नवल किसलय
तितली मन

फैला कुहरा
दिनकर ठहरा
ऋतु बसन्त

©राम केश मिश्र

Author
रकमिश सुल्तानपुरी
रकमिश सुल्तानपुरी मैं भदैयां ,सुल्तानपुर ,उत्तर प्रदेश से हूँ । मैं ग़ज़ल लेखन के साथ साथ कविता , गीत ,नवगीत देशभक्ति गीत, फिल्मी गीत ,भोजपुरी गीत , दोहे हाइकू, पिरामिड ,कुण्डलिया,आदि पद्य की लगभग समस्त विधाएँ लिखता रहा हूं ।... Read more
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