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राष्ट्र की पीड़ा

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

दोहे

February 13, 2017

दुःख-दरद के संग में, दिखी भूख की पीर|
कैसे बोले राष्ट्र का, पीड़ित नहीं शरीर||

देख हाल निज राष्ट्र का, रोता हृदय बृजेश|
दीन हीन लाचार को, क्यों देते हो क्लेेश||

वह सहते संताप जो दें निर्धन को शूल|
राष्ट्र-अमन सद्ज्ञान है सब धर्मों का मूल||

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषिआलोक” कृतियों के प्रणेता

Author
बृजेश कुमार नायक
एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर,... Read more
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