कविता · Reading time: 1 minute

पिता

आज जब मै पिता हूँ।
आप पर क्या गुजरती होगी,
सब समझता हूँ।।

मेरी जरूरतो मे खुद को कैसे दबाया आपने
मजबूरी में भी खुद को मजबूत दिखाया आपने
खुद पुराने मे गुजारा कर मुझे नया पहनाया आपने
खर्च की परवाह बिना बडे स्कूल से पढाया आपने
कंधो पे झुलाया आपने
हरगम मेरा भुलाया आपने
आपके संस्कारो की रोशनी मे मै
आज चाँद सा चमकता हूँ।
आज जब मै पिता हूँ
सब समझता हूँ।।

आपके प्यार का कितना फायदा उठाता था मै
गलतियाँ कर के आपकी गोद मे छिप जाता था मै
जरा सा धमकाने पर आपसे नाराज हो जाता था मै
मनपसंद तोहफा लेकर फिर से खिल जाता था मै
कितना हँसता हँसाता था मै
गलियों मे गीत गाता था मै
सबकी नजरो मे सूखा बादल
पर अंदर अंदर बरसता हूँ
आज जब मै पिता हूँ
सब समझता हूँ ।
#अरमान

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