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पिता

जगदीश लववंशी

जगदीश लववंशी "जेपीएल"

कविता

June 18, 2017

पिता के चरणो में यह शीश नमन,
करता हूँ बार बार उनका वंदन,
धरा का ऊंचा दरख़्त हैं पिता,
परिवार का आधार स्तंभ हैं पिता,
हर कठिनाइयों की ढाल हैं पिता,
हर खुशी की आहट हैं पिता,
हमारे लिए पालते जमाने की चिंता,
उनकी ही गोद में बचपन बीता,
उंगली पकड़कर सिखाया चलना,
हमारे लिए बहाया खून पसीना,
हमारे लिए हो प्रथम पूज्य गुरु,
यह जीवन हुआ आपसे शुरू,
चंदन हैं आपके चरणों की रज ,
आपने पुत्र हेतु दिए सारे सुख तज,
नमन ।।नमन।।नमन।।
वंदन।। वंदन।।वंदन।।
।।जेपीएल।।

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Author
जगदीश लववंशी
J P LOVEWANSHI, MA(HISTORY) ,MA (HINDI) & MSC (MATHS) "कविता लिखना और लिखते लिखते उसी में खो जाना , शाम ,सुबह और निशा , चाँद , सूरज और तारे सभी को कविता में ही खोजना तब मन में असीम शांति... Read more

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