लघु कथा · Reading time: 2 minutes

पिता की इच्छा

” हाँ माँ मैं आपको अभी थोड़ी देर में फोन करता हूँ अभी मिटिंग चल रही
है ।”
दिनेश ने माँ को जबाव दे कर फोन काट दिया और रमादेवी फिर मन मसोसकर रह गयी ।
इसी के साथ उनकी आँखो के आगे एक चलचित्र घुम गया :
” शादी के पाँच साल बाद दिनेश का जन्म हुआ था । घर खुशियों से भर गया था । एक विडंबना यह हुई कि एक एक्सीडेंट में दिनेश के पिता जी का देहान्त हो गया लेकिन जाते जाते वह कह गये : ” इस बच्चे को जिन्दगी की ऊँचाई तक पहुंचाना जिस मुकाम पर मैं नहीं पहुच सका इसे पहुँचाना। दिनेश के पिताजी कलेक्टर आफिस में चपरासी थे । उनकी थोड़ी बहुत पेंशन और बरतन कपड़े करके उन पैसों से दिनेश की पढ़ाई जारी रखी ।
दिनेश के पिताजी का आशीर्वाद था दिनेश आईएएस में सफल हो गया । लेकिन दिनेश तो ऊँचाईयों पर पहुँच गया था लेकिन माँ से वह दूर सा हो रहा था ।”
तभी कालवेल की आवाज़ से तिन्द्रा भन्ग हो गयी ।
दिनेश ने आते ही माँ को गले लगा लिया और कहा :
“माँ आज मैं जो हूँ आपके आशीर्वाद और त्याग के कारण हूँ। ”
माँ ने कहा :
” बेटा यह मेरी तो सिर्फ कोशिश थी तेरे पिताजी का सपना कि तेरे को ऊँचाईयों तक पहुंचाऊ वह पूरा हुआ है बेटा तू ईमानदारी और मेहनत से अपना काम करना यही मेरी इच्छा
है ।”
तभी दिनेश का फोन आया और वह काम में व्यस्त हो गया ।

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