भांगड़ा पा ले

कहो मकर संक्रांति या, इसे लोहड़ी पर्व
रेवड़ी, गजक, भांगड़ा, पा के होता गर्व

क्या कहना इस पर्व का, छाया है फिर हर्ष
पर्व मकर संक्रांति का, दे सबको उत्कर्ष

दक्खन में पोंगल बना, मकर संक्रांति पर्व
भांगड़ा बनी लोहड़ी, छाया हरसू हर्ष

तीन बार बिहु असमिया, आता है हर साल
खेती-बाड़ी से जुड़ा, रखता है खुशहाल

मकर संक्रांति पर्व है, उत्तरायणी सूर्य
दे रहे इष्टदेव* को, हृदय से सभी अर्ध्य**

उत्तरायणी*** भी कहें, हिंदी भाषी लोग
प्रथम पर्व यह सूर्य का, चढ़े देव को भोग
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*इष्ट देव — अपनी पसंद का देवता। जिनसे आप आकर्षित होते हो। उनकी आराधना एवं पूजा करते हो।
**अर्घ्य संस्कृत [संज्ञा पुल्लिंग] — जल, फल-फूल आदि सामग्री जो पूजा में चढ़ाई जाती है। इस चढ़ावे का उपक्रम (पूजा में चढ़ाने योग्य)।
***उत्तरायणी — यह भ्रान्ति है कि उत्तरायण भी इसी दिन होता है। किन्तु मकर संक्रान्ति उत्तरायण से भिन्न है। उत्तरायण का आरंभ 25 दिसंबर को होता है। यह दशा 21 जून तक रहती है। लेकिन यह सूर्य के उत्तर दिशा में आने के बाद प्रथम पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश होने पर; इसलिए इसे उत्तरायणी पर्व नाम भी दिया गया है

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