कविता · Reading time: 1 minute

पायल-चुगलखोर

साँझ ढले
दबे पांव
तेरा छत पे आना
हौले से
आंखों में मुस्कुराना
धड़कनों की
बेताब धौंकनी
मन विभोर
पर,
छनक ही जाती
पायल तेरी
चुगलखोर
पकड़े जाते
दो चोर
-©नवल किशोर सिंह

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