पापा

पापा तुम स्वरूप दाता
पापा तुम माते सिंदूर हो
पापा तुम जीवन दाताऔं
मेरे भाग्य विधाता हो।

पापा ने पाकर मुझे खोया
अपने को ,
बीज की तरह हर पल सींचा मुझको।
भुला अपने को मार्ग नेकी
का दिखाया
बड़ा कर एक सुखद सा
अहसास दिलाया

पापा तुम देख सुखी बेटी
सुख अभिव्यक्ति
बन जाते
पापा तुम देख मुझको
दुःख की व्यथा हो,
सच कहू तो मेरे मन की
विकलता हो।

छोटी थी सत्यता सदाचार
का पाठ पढ़ा
इन्साफ से जीना सिखाया।
आज वो दुलार
याद बरबस याद आ जाता
वो स्नेहमयी
छायामयी साया साथ चल
पलकें भिगोता

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