पापा

(1)????
मै पापा की लाड़ली बेटी हूँ,
मैं पापा की जिन्दगी हूँ।
ये अजीब रिस्ता है ,
आज अपनी कल परायी हूँ।
????

(2)????
पापा होते सबसे खास,
रहते सदा दिल के आस-पास,
बिन बोले समझ जाते हर बात।
????—लक्ष्मी सिंह ?☺

—लक्ष्मी सिंह?☺

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 192

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share