कविता · Reading time: 1 minute

पापा

मुझे लगता नहीं पापा कि कोई दिन विशेष हो
तुम्हें याद करने के लिए भी
तुम तो रोज मेरे शीशे में मुझे पूछते हो
और कैसी है कब घर आएगी
और मैं चुप हंस देती हूँ आप जानते है
बेटी हूँ आपकी आप सी दृढ़
न टूटने वाली अपने निर्णय
पापा चिंता न करो जब भी आऊँगी
तुमसे ही जानी जाऊंगी
ईश्वर का कोटि धन्यवाद करती हूँ
आपकी हर बात याद रखती हूँ
संस्कार संस्कृति और भू अध्यात्म
ईश समर्पण सत्य निष्ठा सत्य ज्ञान
जीवन उद्देश्य सतत प्रयास तुम्हे प्रणाम
जो सिखाया मुझे आपने करतो हूँ आपके नाम
मोहताज नहीं फादर्स डे की
ये तो मात्र औपचारिकता है

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