.
Skip to content

पापा तुम तस्वीर मे रहते हो

NIRA Rani

NIRA Rani

कविता

May 19, 2017

कहते है पापा घर मे रहते है
पर वो कमरे मे नही तस्वीरो मे रहते है

अक्सर उनके साए से बात कर लेता हूं
चुपचाप उन्हे अपनी आगोश मे भर लेता हूं

बिखर जाता हूं एक पल मे ही
उनके सीने से लिपट कर

रो लेता हूं चुपचाप उनकी तस्वीर को पकड़़ कर
क्यूं पापा अब सिर पर हाथ नही फेरते

क्यूं मुझे किसी बात पर नही टोकते
क्यू पापा तुम दूसरे जहॉ मे जा बसे

क्यू पापा तुम इस घर मे नही रहते
सचमुच पापा .. तुम तस्वीर मे रहते हो
क्यू पापा क्यू तुम तस्वीर मे रहते हो

Author
NIRA Rani
साधारण सी ग्रहणी हूं ..इलाहाबाद युनिवर्सिटी से अंग्रेजी मे स्नातक हूं .बस भावनाओ मे भीगे लभ्जो को अल्फाज देने की कोशिश करती हूं ...साहित्यिक परिचय बस इतना की हिन्दी पसंद है..हिन्दी कविता एवं लेख लिखने का प्रयास करती हूं..
Recommended Posts
अभी पूरा आसमान बाकी है...
अभी पूरा आसमान बाकी है असफलताओ से डरो नही निराश मन को करो नही बस करते जाओ मेहनत क्योकि तेरी पहचान बाकी है हौसले की... Read more
क्यू नही!
रो कर मुश्कुराते क्यू नही रूठ कर मनाते क्यू नही अपनों को रिझाते क्यू नही प्यार से सँवरते क्यू नही देख कर शर्माते क्यू नही... Read more
ये माना घिरी हर तरफ तीरगी है
ये माना घिरी हर तरफ तीरगी है मगर छन भी आती कहीं रोशनी है न करती लबों से वो शिकवा शिकायत मगर बात नज़रों से... Read more
आस!
चाँद को चांदनी की आस धरा को नभ की आस दिन को रात की आस अंधेरे को उजाले की आस पंछी को चलने की आस... Read more