पापा! जीवन जी कर दिखाते हैं

पापा नहीं सिखाते
कैसे जीना है जिंदगी
वो तो जीवन
जी कर दिखाते हैं

पापा नही दिखाते
कौन सी है राह सच्ची
वो तो मंज़िल पर
पहुँचना सिखाते हैं

पापा नहीं करते
माँ की तरह प्रेम अँधा
पर उनकी सख्ती में भी
होता है प्यार अटूट

पापा गिरते हुए देखकर भी
नहीं थामते हैं उँगलियाँ
पर खुद से ही खड़े होने का
हमेशा बनते हैं हौसला

पापा करते हैं त्याग
जीवन भर
और
खुद की जरूरतों को
दफनकर
पूरा करते हैं
बच्चों की हर ख़ुशी

लोधी डॉ. आशा ‘अदिति’

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