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*पापा क्यों नहीं आये*

Archana Trivedi 'Jya'

Archana Trivedi 'Jya'

कविता

April 21, 2017

प्यारे प्यारे चन्दा मामा
जग से न्यारे चन्दा मामा
आई मैं छत पर चोरी से
चुपके चुपके दबे पांव से
अपने नन्हें नन्हे कदमों से
अपनी माँ का आँचल छोड़
अपनी निंदिया से मुँह मोड़
तुझसे मैं कुछ कहने आयी
तुझसे मैं कुछ पूँछने आयी
सब दिन हैं बीते जाते
मेरे पापा क्यों नहीं आते
न जाने कितनी दूर गए
मेरे खेल खिलौने टूट गए
ये बात उन्हें बतलाते
मेरे पापा क्यों नहीं आते
अब कौन मुझे टहलाये
मुझको मेला दिखलाये
कोई राह मुझे बतलाते
मेरे पापा क्यों नहीं आते
अब किसकी ऊँगली थामूं
किसकी बाँहों में झूमूँ
ये बात उन्हें समझाते
मेरे पापा क्यों नही आते
जब वो वर्दी में आते
मेरे तन मन सिहराते
बड़े प्यार से गोद उठाते
मेरे पापा क्यों नहीं आते
एक बात बता,दे मुझे पता
किस जगह है ये कश्मीर ?
हुई कौन ख़ता क्यों रहे सता
लोग वहां के क्या होते हैं बेपीर
बेबस मेरे पापा के ऊपर
वह पत्थर क्यों बरसाते
मेरे पापा क्यों नहीं आते……क्यों….??

Author
Archana Trivedi 'Jya'
क़लम चलाना हम कवियों का काम हैl रश्मि बिखराना हम रवियों का काम हैll
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