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पानी

Bikash Baruah

Bikash Baruah

कविता

September 14, 2017

कहीं पर बूंद बूंद
पानी के लिए तरस रहे
लोगों की कतार दिखाई देती,
तो कहीं लोग बेझिझक
व्यर्थ में ही उसे जाया करती;
कुछ लोग पानी की
अस्तित्व जान कर इसे
अमृत समान मानते ,
कुछेक इसे केवल
अपनी प्यास बुझानेवाली
साधारण पदार्थ समझते;
अब मिल रहा है तो
इसका मोल सभी
समझ नहीं रहे,
सोचो जब मुश्किल
होगा इसका मिलना
हम तब क्या करेंगे?

Author
Bikash Baruah
मैं एक अहिंदी भाषी हिंदी नवलेखक के रूप मे साहित्य साधना की कोशिश कर रहा हू और मेरी दो किताबें "प्रतिक्षा" और "किसके लिए यह कविता" प्रकाशित हो चुकी है ।
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