कविता · Reading time: 1 minute

पानी और प्यास

पानी पर हक नहीं
किसी भी सरहद का
सिर्फ प्यास का
पानी पर अधिकार है।

पानी की होती हैं
दो आँखें जिनको
प्यासे का प्रतिबिंब
सिर्फ स्वीकार है।

संजय नारायण

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