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पानी आँखों में ठहरा दिखाई देता है

पानी आँखों में ठहरा दिखाई देता है
सीने में ज़ख्म गहरा दिखाई देता है

अजीब दर्द लिए फिर रहा हूँ सीने में
पुराना है मगर हरा दिखाई देता है

घर की हर बात सुर्ख़ियों में रहती है
किसी का घर पहरा दिखाई देता है

रोता हूँ देख के हालात अब अपने
आईने में तेरा चेहरा दिखाई देता है

घबरा के छिप जाता है अंधेरों में
साया मुझे डरा-डरा दिखाई देता है

ज़िंदा है इसलिए की बाकी जान है
भीतर से पुरव सहरा दिखाई देता है

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Purav Goyal
Purav Goyal
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जवान बेवा की जुल्फें हो गई जिन्दगी न संवारने का दिल ना बनाने का दिल View full profile
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