मुक्तक · Reading time: 1 minute

पाती पिय की

212 212 212 212
प्रेम पाती पिया की मैं ‘ पढ़ने लगी।
मन की’ कोयल खुशी से चहकने लगी।
प्रीति लिखने लगी नैन की लेखनी।
रात – रानी ह्रदय की महकने के लगी।।
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