आना फिर से वोट मांगने

आना फिर से वोट मांगने
◆◆◆◆◆◆◆◆◆
झूठी बातों में उलझाकर
जनता को तड़पाने वालों
आना फिर से वोट मांगने
पाँच साल सिसकाने वालों

अच्छे दिन का राग सुनाकर
फेंक रहे थे इतना ज्यादा
वोट सभी लोगों का पाकर
कहाँ गया वह तेरा वादा
पेट भरा तुम सबका लेकिन
हम सबको तरसाने वालों-
आना फिर से वोट मांगने
पाँच साल सिसकाने वालों

अब भी जुमले फेंक रहे हो
रोजगार की वाट लगाकर
अच्छे-खासे पढ़े-लिखे अब
बेच रहे हैं चाट बनाकर
रोजगार का वादा करके
ठेलों तक पहुँचाने वालों-
आना फिर से वोट मांगने
पाँच साल सिसकाने वालों

चोर-लुटेरे भाग गए सब
चौकीदारी खूब निभाई
जनता की जेबों को देखो
काट रहे हैं तेरे चाई
बात बात में शोर मचाकर
सबकी नींद चुराने वालों-
आना फिर से वोट मांगने
पाँच साल सिसकाने वालों

तुमने ऐसी नीति बनाई
आसमान छूती महँगाई
उनको भूखे मार रहे हो
जिनको तुम कहते थे भाई
बड़े बड़े सपने दिखलाकर
बार बार भरमाने वालों-
आना फिर से वोट मांगने
पाँच साल सिसकाने वालों

वक्त बुरा आया है लेकिन
तुम तो चाँदी काट रहे हो
जाति-धर्म की आग लगाकर
इंसानों को बाट रहे हो
प्यार भरे प्यारे भारत में
कटुता तुम फैलाने वालों-
आना फिर से वोट मांगने
पाँच साल सिसकाने वालों

रचना- आकाश महेशपुरी

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 1 Comment 0
Views 230

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share