पहली सुबह हो तुम

सुना है, आकाश की पहली सुबह हो तुम,
आँखों का चमकता सितारा हो,
हम तुम्हे बस कहते है ज़िंदगी,
दुनिया कहती है, जीने का इशारा हो तुम,

ज़िंदगी जीने को करती मजबूर, ऐसी है,
आँखे तुम्हारी नूर के जैसी है,
झुक गया कदमो में तुम्हारे,
घुटनो से चलकर आना पड़ा, दुरी ऐसी है,

तेरे चेहरे में दुनिया भर के सितारे है,
तेरी आँखों में चमक ऐसी है,
मुस्कुराना पड़ा तुम्हे देखकर,
तनहा उनकी मुस्कराहट में लहर ऐसी है,

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 109

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share