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पहली राखी तेरे बिन

सन्दीप कुमार 'भारतीय'

सन्दीप कुमार 'भारतीय'

कविता

August 18, 2016

सबकुछ सूना सूना है तेरे बिन
हमारी पहली राखी है तेरे बिन

सबकी कलाईयाँ भरी हैं
हमारी कलाई उदास हैं
सबके लबों पर हँसी है
तेरे भाई उदास हैं तेरे बिन
हमारी पहली राखी है तेरे बिन

हर बार तेरा इन्तजार किया
देर होने पर कितना फोन किया
मुस्कान बिखर गयी चेहरे पर
तूने जब प्रेम धागा बांध दिया
अनंत है इन्तजार अब तेरे बिन
हमारी पहली राखी है तेरे बिन

तू देख ले हमें अनंत आकाश से
तेरे लिए वही प्यार का अहसास है
मन थोड़ा भारी है पलकें भी नम हैं
तेरे चले जाने का हम सबको गम है
कौन भरेगा हमारी कलाई तेरे बिन
हमारी पहली राखी है तेरे बिन

माँ जो सेवइयाँ तोड़ते न थकती थी
तेरे लिये डिब्बे भर भर रखती थी
मीठा तो तुझे बिल्कुल पसन्द न था
मैगी जैसी सेवइयाँ तैयार करती थी
मैदा तक न लाई इस बार तेरे बिन
हमारी पहली राखी है तेरे बिन ।

” सन्दीप कुमार ”
18/08/2016

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Author
सन्दीप कुमार 'भारतीय'
3 साझा पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं | दो हाइकू पुस्तक है "साझा नभ का कोना" तथा "साझा संग्रह - शत हाइकुकार - साल शताब्दी" तीसरी पुस्तक तांका सदोका आधारित है "कलरव" | समय समय पर पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित होती... Read more

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