कविता · Reading time: 1 minute

पहली बार

वादा किया है जिन्दगी से मैने पहली बार
करना नही पड़ेगा अब उसे और इन्तजार
ले जाऊंगा उसे मै सपनो के द्वार
महकेगी जब जिन्दगी पतझड़ भी हो जायेगा बहार ।

होगी नही उसकी अब कभी हार
राह मे कितने भी हो पत्थर हजार
दोड़ेगी हवा मे, झेलेगी जिन्दगी
हर बदलते मौसम की मार ।

देखकर जनून जिन्दगी का
आयेगी मंजिल खुद ही हो के बेकरार
गूंजेगा नगाड़ा जब जिन्दगी का
इशारा कर हर दिशा करेगी इकरार ।

बदलते तेवर देख जिन्दगी के
खुदा भी बदलेगा तकदीरे यार
रोके नही कदम अगर यमराज ने
हार जायेगी मौत जिन्दगी से पहली बार ।।

राज विग

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