पहला पहला प्यार

?? ललित छंद??
पहला – पहला प्यार जगत में,
माँ का ही होता है।
भगवान जैसा प्यार माँ के,
प्यार से झलकता है।।
हर बच्चे का पहला रिश्ता,
माँ से ही जुड़ता है।
फिर किसी रिश्ते को बनाने,
के काबिल बनता है।।

वो प्रथम शब्द, पहला सरगम,
माँ की ही लोरी है।
कानों में जो मिसरी घोले,
माँ की ही बोली है।।
पहला आलिंगन, पहला छुअन,
माँ का ही होता है।
पहली थपकी, पहली चुंबन,
माँ का ही होता है।।

हर सही गलत का भेद प्रथम,
माँ ही समझाती है।
इस दुनिया में कैसे जीना,
हमको बतलाती है।।
माँ छोटी-बड़ी जरूरत का,
सदा ध्यान रखती है।
मेरी पसंद ना पसंद का,
जिसे ज्ञान रहती है।।

कभी शिक्षक,कभी चिकित्सक माँ,
आया बन जाती हैं।
माँ बच्चों के खातिर देवों,
से भी लड़ जाती हैं।।
औलाद के हर सितम को माँ,
हँस कर सह जाती हैं।
बच्चों के हर गलती को माँ,
माफी दे जाती हैं।।

दुनिया में जो रिश्ते बनते,
वो सब प्यारे होते।
सभी रिश्तों में सबसे बड़ा,
माँ का रिश्ता होता।।
तुम पहला प्यार उसे पूछो,
जिसे माँ नहीं होती।
माँ के ममता के खातिर जो,
आँखें हरदम रोती।

—लक्ष्मी सिंह ?

175 Views
MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is...
You may also like: