.
Skip to content

पश्चाताप ( कविता)

Onika Setia

Onika Setia

कविता

January 12, 2017

पश्चाताप (कविता)

एक दिन सोचा मैनेें,
एकांत में बैठकर।
क्या खोया जीवन में,
और क्या पाया अब तक।
मूल्यांकन ना कर सके,
न किया विचार अब तकें।
एक ख़ुशी के इंतज़ार में,
सारी उम्र गुज़र गयीें।
जिंदगी रेत की तरह,
हाथ से फिसल गयी।
एक स्वप्न नगरी में घूमते रहे,
किसी की हाथों में हाथ डालकर।
मगर जब आँख खुली तो,
दिल बहुत रोया यह जानकर।
कैसी ख़ुशी ! कैसा साथी !,
यह तो मात्र मेरा भ्रम था।
भुला रखा था खुद को मैने,
यह मेरा कैसा पागलपन था।
जीवन के अंतिम पड़ाव में जब,
रह गए है बस चंद श्वास।
ऐसे समय में जो कुछ शेष है,
और मेरा मात्र पश्चाताप ।

Author
Onika Setia
नाम -- सौ .ओनिका सेतिआ "अनु' आयु -- ४७ वर्ष , शिक्षा -- स्नातकोत्तर। विधा -- ग़ज़ल, कविता , लेख , शेर ,मुक्तक, लघु-कथा , कहानी इत्यादि . संप्रति- फेसबुक , लिंक्ड-इन , दैनिक जागरण का जागरण -जंक्शन ब्लॉग, स्वयं... Read more
Recommended Posts
कविता क्या होती है...?
कविता क्या होती है.....? इसे नहीँ पता,उसे नहीँ पता मुझे नहीँ पता...........! कहते हैँ कवि गण- कविता होती है मर्मशील विचारोँ का शब्द पुँज, कविता... Read more
** आग लगाकर  **
प्यास जगाकर आग लगाकर पूछते हो क्या ज़रा दिलपर अपने हाथ रख धड़कता है क्या क्या पूछते हो दिल अपना पराया हुआ कब अब ना... Read more
**कविता**
---------क्या आप मेरी बात से सहमत हैं ? **कविता** ** * * एक अनपढ़ भी कविता रच सकता है क्योंकि कविता आत्मा की आवाज है... Read more
कलकता के भाईजान
क्या था जो सेवा के दौहरान हुआ, क्या था जो कविता मे गान हुआ। क्या था जो दोस्ती मे हाथ बढ़ा, और क्या था जो... Read more