Skip to content

पवन-डाकिया

शिवानन्द सिंह 'सहयोगी'

शिवानन्द सिंह 'सहयोगी'

कविता

June 17, 2017

पवन-डाकिया

पवन-डाकिया
लेकर आया
खुले गाँव की मधुरिम गंध
मिलने पहुँचे
नदी किनारे
तोड़-ताड़ तरलित तटबंध

तितली फिसली
भँवरे भटके
बिछुड़ चुके पुलकित मकरंद
धोखा खायीं
विचलित लहरें
करके चिपचिप फाटक बंद
हटा चुकी है
धूप धुआँसी
पहरा का विकिरक प्रतिबन्ध

नल पर पाँवों
को धोया है
भिगा पसीना तन का पानी
चूनर धानी
उठा रही है
पहुँच शाम घर ढही पलानी
धूल उड़ी है
छिड़क रहा जल
अतिथि अमी मृदुता-संबंध

सडकें पहुँचीं
काँवड़ लेने
सँवरी-सँवरी शिव की काशी
मानसून भी
परचा भरने
पहुँच चुका केरल से काशी
मौसम भी कुछ
रंग बदलता
तोड़ सभी पिछले अनुबंध

शिवानन्द सिंह ‘सहयोगी’
मेरठ

Share this:
Author

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

आज ही अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साथ ही आपकी पुस्तक ई-बुक फॉर्मेट में Amazon Kindle एवं Google Play Store पर भी उपलब्ध होगी

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

सीमित समय के लिए ब्रोंज एवं सिल्वर पब्लिशिंग प्लान्स पर 20% डिस्काउंट (यह ऑफर सिर्फ 31 जनवरी, 2018 तक)

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you