कविता · Reading time: 1 minute

पल्लू

चुनरी के पल्लू में बंधी
कुछ यादों का खोलना

कुछ सपने बुने थे….
खिड़की से चांद देखना

सुख- दुख की फसल उगी
हर मौसम के फल देखना

खुशी की लहरें, हंसी के फुहारे
हवा का आना- जाना देखना

बूंदों का गिरना, बे मौसम….
आसमान में तारों को देखना
…..

….

….

शीला गहलावत सीरत
चण्डीगढ़, हरियाणा

3 Likes · 1 Comment · 120 Views
Like
99 Posts · 11.6k Views
You may also like:
Loading...