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पर खुशियों की बात नहीं है.......

गज़ल

ग़म का तो अब साथ नहीं है,
पर खुशियों की बात नहीं है।

प्यार वही है पहले जैसा,
लेकिन वो जज़्बात नहीं है।

कितनी रातें रोई शबनम,
यह कोई बरसात नहीं है।

कट जाती है जैसे तैसे,
पर दौलत इफरात नहीं है।

दोस्त नहीं हैं पहले जैसे,
पर दुश्मन सी घात नहीं है।

मुद्दों पर कुछ बात उठी है,
यह झगडा बे-बात नहीं है।

तुम जैसों को टक्कर देना,
सबके बस की बात नही है।

-आर० सी०शर्मा “आरसी”

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Ramesh chandra Sharma
Ramesh chandra Sharma
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गीतकार गज़लकार अन्य विधा दोहे मुक्तक, चतुष्पदी ब्रजभाषा गज़ल आदि। कृतिकार 1.अहल्याकरण काव्य संग्रह 2.पानी...
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