Jun 5, 2016 · कविता
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पर्यावरण

आज विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रस्तुत मुक्तक….

दिन-दिन बढ़ता ताप धरा पर,मानव तू अबतक अंजान।
यह विकास है राह पतन की,अपनी त्रुटियों को पहचान।
जल-थल-वायु प्रमुख स्रोत सभी,किये प्रदूषित मानव ने,
अभी न रोका चक्र दोहन का,धरा न हो जाये वीरान।

अर्चना सिंह?

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Archana Singh
Archana Singh
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मैं छंदबद्ध रचनाऐं मुख्यतः दोहा,कुण्डलिया और मुक्तक विधा में लिखती हूँ, मुझे प्रकृति व मानव... View full profile
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