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******पर्दे के पीछे का सच*****

साहित्यकारा नीरू मोहन

साहित्यकारा नीरू मोहन

कहानी

February 3, 2017

***किसी ने क्या खूब कहा है***

*******कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती |
*********लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती |

—–आधुनिकता की चकाचौंध में इन पंक्तियों का न रहा कोई मोल——-

सुनो आज तुम ये कहानी |
न इसमें राजा है न ही कोई रानी |
जो है शायद तुम्हारी अपनी ही अनकही कहानी |
पर्दे के पीछे की अपनी-अपनी जुबानी |

ऑफिस हो या हो दफ्तर
सरकारी कार्यालय या शिक्षा स्थल |
सभी जगह देखा है जाता |
अफसरों का है हर जगह बोल-बाला |

तरक्की वही है कर पाता |
जो अफसर के मन का प्यारा |
मेहनत करने वाला देखो हाथ ही मलकर रह जाता |

जो अफसर का होता प्यारा तनख्वाह लेता मौज मनाता |
चने मुरमुरे जेब में भरकर,
चाय कॉफी ले मौज उड़ाता |

काम करने वाला बेचारा तानाशाही में दबता जाता |
जो इसका विरोध है करता |
तरक्की की दौड़ में पीछे हैं वह रह जाता |

******अब करते हैं उसकी बात जो नहीं कुछ करता हैं |
******दफ्तर में जाकर केवल मौज-मस्ती ही करता है |

नाच न जाने आँगन टेढ़ा |
अपने ही मुँह मियाँ मिट्ठू बनता |
चुगली कर शाबाशी पाता |
ऊँचे पद को भी पा जाता |

रत्ती भर भी अकल न होती |
ज्ञान की जिनको समझ न होती |
पढ़े लिखो को अपने आगे |
वक्ता कभी न वह बनाता |

*******क्या खूब कहा है उसके लिए जो काम करता है |
*******अपना संपूर्ण जीवन काम को ही समर्पित करता है |

काम भी उसी से बनता सबका |
काम करवाने दौड़ के आते |
नहीं तो सुन रे मेरे भैया |
दूध में पड़ी मक्खी की भांति ,
आँख किसी की वो न भाता |

देती नीरू यह तुमको सीख |
सुनना सबकी,करना अपनी |
अपने अस्तित्व को रखना कायम,चाहे जितनी भी हो सख्ती |
डरना केवल उससे तुम जिसकी लाठी में दम है |
झुकना नहीं किसी के आगे ईश्वर सबसे बढ़कर है |

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Author
साहित्यकारा नीरू मोहन
व्यवस्थापक- अस्तित्व जन्मतिथि- १-०८-१९७३ शिक्षा - एम ए - हिंदी एम ए - राजनीति शास्त्र बी एड - हिंदी , सामाजिक विज्ञान एम फिल - हिंदी साहित्य कार्य - शिक्षिका , लेखिका friends you can read my all poems on... Read more
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