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परेशान तन है ……..

Awneesh kumar

Awneesh kumar

कविता

March 10, 2017

परेशान तन है
बेचैन मन है

उलझन में जान है
बहुत परेशान है

पत्तो सा टूट रहा हु
किसी बंधन सा छूट रहा हु

तिल-तिल मर रहा हु
घुट-घुट कर जी रहा हु

कुछ ना किया तो हार है
कुछ किया तो जीत कर भी हार है

कैसी ये मजधार
आँखों में आँशु की धार है
मन बहुत परेशान है।(अवनीश कुमार)

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Author
Awneesh kumar
नमस्कार अवनीश कुमार www.awneeshkumar.ga www.facebook.com/awneesh kumar

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