परीक्षा

जांच परख के काम को
पर इच्छा अनुमान को
प्रतिभा की पहचान का
परीक्षा नाम कहलाता है ।
हर क्षेत्र में अलग अलग
कार्यकुशलता की परख
प्रामाणित करने योग्यता
परीक्षा महत्व पाया है ।
जो हो जाते है सफल
परिणाम उनका वेहतर
असफल होते निरश
परीक्षक दोष पाता है ।
परीक्षा का सबको डर
पास होने करें नकल
इच्छा नहीं मजबूरी में
परीक्षा को निभाया है ।
जिनका होता दृढ़ संकल्प
बचने का नहीं विकल्प
मेहनत लगन व कष्ट उठा
सुखद परीक्षाफल पाया है ।
कर्म कर्तव्य व भक्ति ज्ञान
सबका लेखा व परिणाम
विधाता ने परखा होगा
तभी मानव तन पाया है ।
सांसारिक जीवन में
दृश्य है परीक्षा विधान
बेईमान व चालक लोग
सफल होते रहते है ।
परमात्मा का अदृश्य विघान
न सिफारिश न पहचान
कर्मों का निष्पक्ष फल
जीव भोगता आया है ।
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राजेश कौरव सुमित्र

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उच्च श्रेणी शिक्षक के पद पर कार्यरत,गणित विषय में स्नातकोत्तर, शास उ मा वि बारहा...
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