परीक्षा

लो आ गयी परीक्षा,
है प्रभु की इच्छा।
साल भर कुछ पढ़ा नहीं,
ज्ञान मन में गढ़ा नहीं।
चिंता भयंकर छायी है
परीक्षा की बेला आयीं है।

वर्ष भर मैंने बिता दी
मस्ती और मौज उड़ा ली।
टी वी क्रिकेट और खेल
साल बीता इसी रेलमपेल।

आज मन सिसक रहा
तन बहुत झुलस रहा।
सुन परीक्षा की खबर
सर चढ़ गया ज्वर।

पढ़ लेता अगर साल भर
सुन लेता शिक्षको को पल भर।
आज यह दिन न देखता
आसुओ से मन न पिघलता।

आज प्रभु से है दुआ
पार लगा दे किसी तरहा।
अगले साल ऐसा न करूँगा
मन लगाके साल भर पढूंगा।

*रोहित शर्मा “राही”*
भंवरपुर, जिला-महासमुंद(छ.ग.)

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