परिवार के स्तंभ।

प्रत्येक पुरुष के सफलता के पीछे नारी का हाथ होता है,और यह मानना भी उचित है कि हर नारी के सफलता के पीछे पुरुष का हाथ होता है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि पुरुष और स्त्री एक ऐसी शृंखला है जिसकी हर कड़ी उसके परिवार को और उसके समाज को मजबूत बनाती है।कहते हैं की, परिवार से बड़ा कोई धन नहीं होता है। पिता से बड़ा कोई सलाहकार नहीं होता है। मां के आंचल से बड़ी कोई दुनिया नहीं होती है। भाई के जैसा कोई अच्छा भागीदार नहीं होता है। बहन से बड़ा कोई शुभचिंतक नहीं होता है। यही सब मिलकर हमारा परिवार है और हर एक व्यक्ति परिवार का आधारस्तंभ।

माता पिता यानी जन्मदाता। एक नारी के जीवन में उसके माता, पिता, पति ,भाई ,बहन और बुजुर्ग उसके परिवार की स्तंभ होते हैं। बचपन में पिता संस्कार के बीज बोकर नैतिकता की खाद डालकर अपने उपवन के पौधों को यानी उसके बच्चों को लहू देकर सिंचता है ।और उस उपवन की सबसे प्यारी बीज होती है उसकी बेटी।उत्तरदायित्व, कर्तव्यपरायणता, अनुशासन, नैतिकमूल्य, स्वावलंबन, स्वाभिमान, और जिम्मेदारी यह सब गुण एक पिता अपने उपवन के उस बीज को देना चाहता है। जिससे उसकी बेटी हर बड़ी से बड़ी मुश्किल का सामना साहसपूर्वक और हसते हुए करें। एक पिता के नेतृत्व से मिला मार्गदर्शन नारी के जीवन के हर कदम पर अपने पिता का साथ होने का उसको एहसास दिलाता है।

एक नारी के जीवन में उसके बड़े भाई का महत्व उसके पिता स्वरूप होता है। बचपन से लेकर अपनी बिदाई तक, पढ़ाई से लेकर अपनी अनुज बहन के हट पूरे करने तक वह भाई हमेशा उसकी ढाल बन कर खड़ा रहता है। अपने बहन को विदा करने के बाद भी एक भाई का दिल हमेशा अपने बहन के लिए प्यार भरा और सहाय्यता भरा होता है। बड़ा भाई एक दोस्त और पिता होने की भूमिका हर नारी के जीवन में निभाता है।

भाई बहन का रिश्ता कुछ
खास होता है।
जब आंच आए बहन पर
वह यमराज से लड़ने को भी ताकत रखता है।

घर में छोटे भाई का होना मानो जैसे खुशियों का पिटारा होता है। छोटा भाई अपनी बहन में हमेशा अपनी मां की छवि को महसूस करता है। उसकी हर शरारत और जोर से हंसी की आवाज घर को खुशियोंका आंगन बनाता है।नारी अपने बढ़ो तथा छोटो से भी बहुत से मूल्य ग्रहण करती है। हर मुश्किलों का सामना करना वह अपने बड़े भाई से सीखती है,और हर मुश्किलों में खुद को मुस्कुरा कर रखना और सामर्थ्य से हर घड़ी में डट कर रहना यह अपने छोटे भाई से सीखती है।

सेवा , त्याग और सदाचार के नीव पर आधारित हमारी समाज व्यवस्था एक नारी को उसके जीवन में सुसंपन्न तथा परिपक्व बनाती है और यह नीव उसको उसके परिवारजनों के बदौलत मिलती है।
जब नारी अपने मां के साथ रसोई बनाने की शिक्षा ले रही होती है उस समय अपने पिताजी,चाचाजी और दादाजी के साथ भी आर्थिक नियोजन और सामाजिक परिवर्तन की भाषा भी सीख रही होती है।
आज की नारी न केवल माता अन्नपूर्णा है अपितु वह माता सरस्वती का रूप भी है और घर की अर्थ व्यवस्था बनाए रखने में वह अपने पति के साथ लक्ष्मी का रूप भी प्रकट करती है।

पति का सहयोग चाहे वह कोई भी स्तर पर हो शादी के बाद पढ़ाई से लेकर खुद की रुचि और कौशल्य विस्तारित करने में एक पति का सहयोग बहुत मूल्यवान होता है। पत्नी के जीवन में पति न केवल उसका स्वामी होता है तथापि उसका सबसे अच्छा दोस्त भी होता है। गृहिणी का आराध्य दैवत पति ही है और पत्नी अपने पति के लिए संपूर्ण जीवन का समर्थन करती है पति पत्नी समाज की एक ऐसी श्रृंखला है जिसकी कड़ी सत्यता, सहनशीलता , मृदुता और सदाचार पर निर्भर होती है। जब पति अपनी पत्नी की उन्नति के लिए कुछ कदम उठाता है तब वह नारी अपने जीवन मे आसमान को छू लेती है । जब पति अपनी अर्धांगिनी से पलभर मुस्कुराकर बात करता है ,तब उसकी ऊर्जाशक्ति दुगना हो जाती हैं। जिस घर में नारी का सम्मान होता है, अपने पति से बहुमूल्य शब्दों का सहयोग मिलता है तब हर नारी एक इतिहास रचती है।इसीलिए एक नारी का पति उसके जीवन में सबसे महत्वपूर्ण आधारस्तंभ की भूमिका निभाता है।

परिवार को संभालने के लिए एक नारी के जीवन में उसके मां, दादी,काकी, बहन, सासूजी आदि नारियों का भी बहुत प्रभाव होता है। एक परिवार को सकुशल,सक्षम ,आत्मनिर्भर रखने हेतु यह लक्ष्मीया घर का स्तंभ होती है। बचपन से लेकर एक नारी के बिदाई तक बेटियों को फूलों में सजाकर कहानियां सुनाने वाली उसकी दादीमां,नानीमां होना एक नारी की सबसे बड़ी ताकत बन जाती है। घर के बुजुर्ग दादा,दादी ताउजी यह तो परिवार की नीव होते हैं कहते हैं ना नीव से ही परिवार की योग्यता का बहुत सा परिचय होता है। इमारतों की चमक और ऊंचाइयों पर मत जाना अगर बुजुर्ग मुस्कुराते हुए दिखाई दे तो समझ जाना आशियाना अमीरों का है। हमारे बुजुर्ग हमारी धरोहर है और यही धरोहर जिंदगी में हर कदम पर साथ देती है।

हर महिला का सबसे उत्तम कर्तव्य है की वो अपने परिवार का स्तंभ बने।

एक लड़की को शैक्षणिक करियर बनाने में उसकी भाभी,बहन हमेशा सहायता करती है। एक लड़की को संस्कारी,समंजस और अपने अनुभव के साथ घर की महिलाएं उसके जिंदगी का सामर्थ्य बन जाती है। अपनी पोती के बालों में तेल लगाते वक्त उसकी दादी उसको स्नेह,सभ्यता तथा कठोर समय में निर्णय लेने का ज्ञान भी सहजता से देती है।

इस तरह से एक नारी के बचपन से लेकर जीवन भर उसको परिवार के स्वरूप में सहयोग तथा साथ रहता है और इन सभी का मूल्य और अहमियत नारी के जीवन में हमेशा बंधा रहता है।

जहा प्यार,स्नेह और हर पल खुशियों का पिटारा होता है।
वो परिवार जिंदगी का सहारा होता है।
जहा परिवार का हर एक व्यक्ति परिवार की धारणा होता है।
वो हर व्यक्ति परिवार का आधारस्तंभ होता हैं।

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