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समय-सुगति पहचान , यही है संसारी सच

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

कुण्डलिया

April 2, 2017

सच बसंत ऋतु आ गई,कोंपल बनी प्रधान|
प्रिया होंठ मुस्कुराहट, छोड़ें, तज अवशान||
छोड़ें, तज अवशान,फूल पर भँवरा आया|
शुभ पुरवाई संग, शांतआँचल लहराया||
कह “नायक” कविराय,परिंदे नचें व्योम बिच|
समय-सुगति पहचान ,यही है संसारी सच||

बृजेश कुमार नायक
जागा हिंदुस्तान चाहिए एवं क्रौंच सुऋषि आलोक कृतियों के प्रणेता

छोड़ें=बंधन से निर्मुक्त करें
प्रिया=पत्नी

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Author
बृजेश कुमार नायक
कोंच,जिला-जालौन (उ प्र) के बृजेश कुमार नायक साहित्य की लगभग सभी विधाओं के रचनाकार हैं |08मई 1961को ग्राम-कैथेरी(जालौन,उ प्र)में जन्में रचनाकार बृजेश कुमार नायक की दो कृतियाँ "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" प्रकाशित हो चुकी है |पूर्व राज्य... Read more
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